HARYANVI POEM: BY AAKASH SHARMA

स्वरचित हरियाणवी कविता के माध्यम से तालिबान द्वारा पेशावर में किए गए निर्मम हत्याकांड की अालोचना करता हूँ और तमाम शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ|

12वाँ महीना, सन14, दिन16 का आया था।
तालिबान की काली करतूत नै,इसा कहर बरपाया था।।
फूल कुचल दिए थे क्यारी के,माली तक जिंदा जलाया था।
इसा खून बहाया था,पूरा पेशावर थर्राया था।।

मासूम किलकियाँ भी सुनी नहीँ,छाती मै पित्तल घाल दिया।
कइयाँ के सपने थे जिनमै,मासूम संसार उजाड दिया।।
मिह बरसाया गोलियाँ का,तनै जान लूटली 141|
रै जुल्मी मैँ तनैँ बुझूं, कुक्कर चाली तेरी AK-47 ।।

सोच कै देखिए उन माआँ की,जिनै वे पाले-पौसे होगें|
रोज लाड लडांदी होगी,अर सपने भी कितने सोचे होगें||
बाप था उनका जो,एक आंजू तक भी आन नी दे था|
अर तनै पाड कै छाती उनकी, क्यूँ किलकी कडवादी रै||
तालिबान मैं तनै बुझूं,इसा कौनसी किताब पढ़ागी रै|

खुद नै वे धर्म के, ठेकेदार बतावै सै|
खेलणिए बालक मार दिए,न्यूँ कौनसा धर्म बतावै सै||
माँ के छीन लिए लाल तनै,बाप की उंगली सुन्नी करदी|
तनै बुझूं मैं तालिबान न्यूँ ,कौनसा मजहब सिखावै सै||

रै मातम छाया था पाक मै, दुःख भारत कै भी घणा होया था|
आगै कंधा करया भारत नै,इसा अजूबा होया था||
सिर कांधे पै धर कै पाक,बिलख बिलख कै रोया था|
रै तनै बुझूं मैं तालिबान,तेरा कौनसा मकसद पूरा होया था||

इस्लाम नै बदनाम करै तू, मुस्लमान तू हो नी सकता|
पेशावर का छिन्या बचपन,मोहम्मद का चेला तू हो नी सकता||
जेहाद़ जेहाद़ करै तू फिरता,जेहाद़ का मतलब पता नहीं|
तनै जान बदल दी जनाज्याँ मै,तू अपनी माँ का भी हो नी सकता||

इसा चाला करया तनै,तू किसी धर्म जात का हो नी सकता|
तू पैदावार सिर्फ उग्रवाद की,किसी माँ का जाम्या हो नी सकता||
तेरै हाय लागेगी उन माआँ की,ज्यूँ-ज्यूँ कलेजा उनका पाटेगा|
जिद देखुगाँ तालिबान ,फेर कडै़ तू भाजेगा||

कफ़न की तो सोचै मत ना, तनै माटी भी नसीब होवै ना|
घणे करे तनै कुकर्म ,हिसाब जहन्नुम मै भी होवै ना||
जुल्म डहाए तनै धरती पै,आकाश गवाह तेरी करतूताँ का|
फेर जानिए तालिबान के मतलब था मेरी बातां का||

आकाश शर्मा||
छात्र:- बी.ए.एल.एल.बी.(तृतीय वर्ष)
कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी,कुरूक्षेत्र||
मो.न०- 09034644081

https://docs.google.com/document/d/1C21QGCdlfTiAPicIqY1jOKM1fQQ3sX85En_Ny2xkmWE/edit?usp=sharing

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